AAP BANARANSI HAIN

11

May
2018
बातकेवल गलियों कीनहीं
Posted by: admin /2010
बातकेवल गलियों कीनहीं है, न केवल मंदिरों कीऔर न ही केवल घाटों की | सचकहूँ …..ये सारा शहर हीबाहों में बाहें डालकर चल देता है …गरल सखी की तरह | साथ में दौड़ता है, लड़खड़ता है, हँसता है, रोता है औरकभी-कभी मजे भी ले लेता है फिर उस बनारसी गाली के साथ पान में सने […]
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11

May
2018
बनारस में हरसुबह
Posted by: admin /1430
बनारस में हरसुबह कथाओं के साथ होती है | सूरज रोज ढेर सारी कथाएं बनारस में छिड़क देता है | ये कथाएंसबसे पहले घाटों पर बरसती है | सूरज के साथ उगने वाली ये कथाएं कभी अस्त नहीं होती | सच में कथाएं अस्त होती ही नहीं है …बस धूमिल हो जाती है | बनारस […]
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11

May
2018
पापा तुम सच में….
Posted by: admin /850
I know that you will not be able to read all this on Facebook. Father’s Day is just like the excuse …. There is a lot to say … I can never say anything on the front. Because you have neither the courage nor the ability to say thank you. ………. Papa, you are really […]
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11

May
2018
खूबसूरत
Posted by: admin /950
तुम पुलों में “विश्वसुन्दरी” हो, खूबसूरत, ऐतिहासिकऔर मैं रामनगर का निर्माणाधीन पुल | लेकिन एक बात लिख लो ………तुम्हारेमें अब बस परिवर्तन हो सकता है या विध्वंस लेकिन मेरा निर्माण शेष है | लोगों का ज्यादा ध्यान मुझपर है | मैंबनारसियों और रामनगरियों को तुमसे बेहतर जोड़ता हूँ | लोग मेरे “पीपा” स्वरूप को भी […]
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11

May
2018
समय कई बार घाव देता है
Posted by: admin /1120
Time wounds many times. Time also heals wounds. Benares have a wound given by time to get away from Banaras. Ghats, the melodies caused by the lanes, these wounds severely on the wound. Painful poke. Not that it does not wound. In the busy life and lap of other cities, the wound is filled. Time […]
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11

May
2018
ईद मुबारक
Posted by: admin /1170
ईद की सारी यादें “ईदगाह” से ताज़ा हो जाती हैं | ईदगाह वो सिगरा वाला नहीं …. प्रेमचंद की कहानीवाला ईदगाह….चिमटे की कहानी वाला ईदगाह …| प्राइमरी की क्लास में मास्टर जी ईदगाह कहानी उसी से पढ़वाया करते थे …. “तुम्हारी उँगलियॉँ तवे से जल जाती थीं, इसलिए मैने इसे लिया|” इतनापढ़कर वो अक्सर रो […]
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11

May
2018
शायद यह जानने
Posted by: admin /920
शायद यह जानने के लिए शाम को पतंगे और ज्यादा ऊंचाई पर उड़ जाती है कि सूरज किसके पीछे छिप रहा है ……या फिर यह भी हो सकता है कि पतंग एक नज़र में सारे बनारस को देख लेनाचाहती हो | वह हर गली के ऊपर घूमना चाहती हो| वह हर बनारसी के आँगन में […]
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11

May
2018
वोअस्सी घाट था
Posted by: admin /1260
वोअस्सी घाट था जहाँ पर मन जेब के सिक्के की तरह निकल कर खन्न से लुढ़क गया था |……..घाट की सबसे ऊपर वाली सीढ़ी से गंगा मैया के आँचल तक लुढ़का था | लेकिन वो वहीँ पर पड़ा नहीं रहा था | उठकर आया था ….मेरे से एक हाँथ सामने खड़ा था| मेरे उदास चेहरे […]
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11

May
2018
मैं..बनारस हूँ
Posted by: admin /740
मैं..बनारस हूँ ! ध्यान रहें महाभारत वाला समय नहीं | मेरी अपनी घड़ी है उस ‘समय’ से बिलकुल अलग, अलमस्त सी, क्यूट सी |समय तो यहाँ दशाश्वमेघ घाट पर नहाता है फिर अस्सी घाट पर भाँग खाये पड़ा रहता है | मैंने सतयुग देखा है और तुम सबको भी देख रहा हूँ | सचमें, सतयुग […]
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11

May
2018
शुरुआतही कुछ ऐसी हुई है|
Posted by: admin /1300
……शुरुआतही कुछ ऐसी हुई है| …जैसे शरीर में ढेर सारी नसें बिछी हुई है, टेढ़ी-मेढ़ी, छोटी-लम्बी, चौड़ी-संकरी और कुछ बेअंत-सी जैसे की बनारस की उलझी हुई सी सुलझी गलियां| सही कह दूँ तो शरीर में एक छोटा सा बनारस बस गया है| और इन नसों में ये गलियां बिछ गई हैं| बसइन्हीं पर भागने का […]
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